Friday, October 5, 2018

मनोविज्ञान महत्वपूर्ण

शिक्षा मनोविज्ञान से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्‍न 1 – बुद्धि का सबसे पुरा ना सिद्धान्‍त कौन सा है।
उत्‍तर – बुद्धि का सबसे पुराना सिद्धान्‍त एक कारक सिद्धान्‍त है।

प्रश्‍न 2 – बुद्धि का द्विकारक सिद्धान्‍त किसने दिया।
उत्‍तर – स्‍पीयर मैन ने दिया।

प्रश्‍न 3 – स्‍पीयर मैन कहॉं के निवासी थे। 
उत्‍तर – स्‍पीयर मैन फ्रांस के निवासी थे।

प्रश्‍न 4 – स्‍पीयर मैन पहले किस विषय के प्रोफेसर थे।
उत्‍तर – स्‍पीयर मैन पहले सांख्यिकी विषय के प्रोफेसर थे बाद में मनोविज्ञान के प्रोफेसर बने।

प्रश्‍न 5 – स्‍पीयर मैन ने बुद्धि का सम्‍बन्‍ध किस से बताया है।
उत्‍तर – स्‍पीयर मैन ने बुद्धि का सम्‍बन्‍ध चिन्‍तन से बताया है।

प्रश्‍न 6 – पियाजे के अनुसार निम्‍नलिखित में से कौन सी अवस्‍था है जिसमें बच्‍चा अमूर्त संकल्‍पनाओं के विषय में तार्किक चिंतन करना आरंभ करता है।
उत्‍तर – औपचारिक संक्रियात्‍मक अवस्‍था

प्रश्‍न 7 – बच्‍चों में बौद्धिक विकास की चार विशिष्‍ट अवस्‍थाओं की पहचान की गई।
उत्‍तर – पियाजे द्वारा

प्रश्‍न 8 – ‘’विकास कभी न समाप्‍त होने वाली प्रक्रिया है’’ यह विचार किससे संबंधित है।
उत्‍तर – निरन्‍तरता का सिद्धांत

प्रश्‍न 9 – वह अवस्‍था जब बच्‍चा तार्किक रूप से वस्‍तुओं व घटनाओं के विषय में चिंतन प्रारंभ करता है।
उत्‍तर – मूर्त संक्रियात्‍मक अवस्‍था

प्रश्‍न 10 – किस अवस्‍था मे बच्‍चे अपने समवयस्‍क समूह के सक्रिय सदस्‍य हो जाते है।
उत्‍तर – किशोरावस्‍था

प्रश्‍न 11 – बच्‍चे के संज्ञानात्‍मक विकास को सबसे अच्‍छे तरीके से कहॉ परिभाषित किया जा सकता है।
उत्‍तर – विद्यालय एवं कक्षा में

प्रश्‍न 12 – पियाजे के अनुसार बौद्धिक विकास का निर्धारक तत्‍व नही है।
उत्‍तर – सामाजिक संचरण

प्रश्‍न 13 – बालकों की सोच अमूर्तता की अपेक्षा मूर्त अनुभवों एवं प्रत्‍ययों से होती है। यह अवस्‍था है।
उत्‍तर – 7 से 12 वर्ष तक

प्रश्‍न 14 – संवेदी पेशीय अवस्‍था होती है।
उत्‍तर – 0 - 2 वर्ष तक

प्रश्‍न 15 – एक 13 वर्षीय बालक बात-बात में अपने बड़ों से झगड़ा करने लगता है और हमेशा स्‍वयं को सही साबित करने की कोशिश करता है वह विकास की कौन सी अवस्‍था है।
उत्‍तर – किशोरावस्‍था

प्रश्‍न 16 – ‘खिलौनों की आयु कहा जाता है।‘
उत्‍तर – पूर्व बाल्‍यावस्‍था को

प्रश्‍न 17 – उत्‍तर बाल्‍यावस्‍था में बालक भौतिक वस्‍तुओं के किस आवश्‍यक तत्‍व में परिवर्तन समझने लगता है।
उत्‍तर – द्रव्‍यमान,  संख्‍या और क्षेत्र

प्रश्‍न 18 – दूसरे वर्ष के अंत तक शिशु का शब्‍द भंडार हो जाता है।
उत्‍तर – 100 शब्‍द

प्रश्‍न 19 – शर्म तथा गर्व जैसी भावना का विकास किस अवस्‍था में होता है।
उत्‍तर – बाल्‍यावस्‍था

प्रश्‍न 20 – मैक्‍डूगल के अनुसार मूल प्रवृति ‘जिज्ञासा’ का संबंध कौन संवेग से है।
उत्‍तर – आश्चर्य

प्रश्‍न 21 – शैशवावस्‍था की मुख्‍य विशेषता नही है।
उत्‍तर – चिन्‍तन प्रक्रिया

प्रश्‍न 22 – किसी विद्यार्थी कह सबसे महत्‍वपूर्ण विशेषता है।
उत्‍तर – आज्ञाकारिता

प्रश्‍न 23 – मानवीय मूल्‍यों, जो प्रकृति में सार्वत्रिक हैं, के विकास का अर्थ है-
उत्‍तर – अभिव्‍यक्ति

प्रश्‍न 24 – किस स्‍तर के बच्‍चे अपने समकक्षी वर्ग के सक्रिय सदस्‍य बन जाते है।
उत्‍तर – किशोरावस्‍था

प्रश्‍न 25 – विकास शुरू होता है।
उत्‍तर – प्रसवपूर्ण अवस्‍था से

प्रश्‍न 26 – बहुविध बुद्धि सिद्धांत के अनुसार सभी प्रकार के पशुओं, खनिजों और पेड़-पौधों को पहचाने और वर्गीकृत करने की योग्‍यता .................. कहलाती है।
उत्‍तर – संज्ञानात्‍मक गतिविधि

प्रश्‍न 27 –पियाजे के अधिगम के संज्ञानात्‍मक सिद्धांत के अनुसार, वह प्रक्रिया जिसके द्वारा संज्ञानात्‍मक संरचना को संशोधित किया जाता है ................. कहलाती है।
उत्‍तर – समावेशन 

प्रश्‍न 28 – कोहलबर्ग के अनुसार सही और गलत प्रश्‍नों के बारे में निर्णय लेने में शामिल चिंतन प्रक्रिया को कहा जाता है।
उत्‍तर – नैतिक तर्कणा

प्रश्‍न 29 – एक व्‍यक्ति अपने समकक्ष व्‍यक्तियों के समूह के प्रति आक्रामक व्‍यवहार करता है और विद्यालय के मानदंडों को नही मानता। इस विद्यार्थी को ..................... में सहायता की आवश्‍यकता है।
उत्‍तर – भावात्‍मक क्षेत्र

प्रश्‍न 30 – शिक्षक को यह सलाह दी जाती है कि वे उपने शिक्षार्थियों को सामूहिक गतिविधियों में शामिल करें, क्‍योंकि सीखने को सुगम बनाने के अतिरिक्‍त, ये.................... में भी सहायता करती है।
उत्‍तर – समाजीकरण

प्रश्‍न 31 – ब्रूनर किस समप्रदाय के समर्थक थे।
उत्‍तर – संज्ञानवादी

प्रश्‍न 32 – कौन सा सिद्धान्‍त जीव विधि के हर क्ष्‍ोत्र पर बल देता है।
उत्‍तर – क्षेत्रीय सिद्धान्‍त

प्रश्‍न 33 – गेस्‍टाल्‍ट का अर्थ क्‍या है।
उत्‍तर – सम्‍पूर्ण या समग्र

प्रश्‍न 34 – प्रतिस्‍थापन का सिद्धान्‍त किस वैज्ञानिक ने दिया।
उत्‍तर – गुथरी ने

प्रश्‍न 35 – स्‍वसिद्धान्‍त किसने दिया ।
उत्‍तर – कार्ल रोजर ने

प्रश्‍न 36 –आवश्‍यकता का पद सोपान सिद्धान्‍त किसने दिया।
उत्‍तर – अब्राहम मैस्लो ने

प्रश्‍न 37 – अधिगम का अर्थ क्‍या है ।
उत्‍तर – सीखना

प्रश्‍न 38 – अधिगम से क्‍या तात्‍पर्य है।
उत्‍तर –मानव व्‍यवहार में होने वाला स्‍थाई परिवर्तन अधिगम कहलाता है।

प्रश्‍न 39 – अधिगम पूर्ण कब होगा।
उत्‍तर – मानव व्‍यवहार में स्‍थाई परिवर्तन हो जाये।

प्रश्‍न 40 – संज्ञान किसे कहते है।
उत्‍तर – किसी ज्ञान को ग्रहण करना ही संज्ञान कहलाता है।

प्रश्‍न 41 – व्‍यवहारवादी मनोविज्ञान के जनक कौन है।
उत्‍तर – वाटसन ।

प्रश्‍न 42 – मनोविज्ञान के जनक कौन है।
उत्‍तर – सिंगमड फ्रायड

प्रश्‍न 43 – मनोविशलेषणात्‍मक मनोविज्ञान के जनक कौन है।
उत्‍तर – सिंगमड फ्रायड

प्रश्‍न 44 – अंधो की लिपि के जनक कौन है  
उत्‍तर – लुई ब्रेल

प्रश्‍न 45 – L . K . G व U . K . G  पद्धति के जनक कौन है।
उत्‍तर – फ्रोबेल

प्रश्‍न 46 – नर्सरी पद्धति के जनक कौन है।
उत्‍तर – मारिया मान्‍टेसरी

प्रश्‍न 47 – भूल एवं प्रयत्‍न सिद्धान्‍त किसने दिया।
उत्‍तर – थॉर्नडाइक ने

प्रश्‍न 48 - अनुकूलित अनुक्रिया या क्‍लासिकी अुनबन्‍ध सिद्धान्‍त किसने दिया ।
उत्‍तर – पैवलॉव ने

प्रश्‍न 49 – क्रिया प्रसूत अनुबन्‍ध सिद्धान्‍त किसने दिया ।
उत्‍तर – स्किनर ने

प्रश्‍न 50 – जीनप्‍याजे किस विचारधारा के समर्थक थे।
उत्‍तर – संज्ञानात्‍मक

प्रश्‍न 51 – जीनप्‍याजे किस देश के निवासी थे।
उत्‍तर – स्विट्जरलैण्‍ड के

प्रश्‍न 52 – जीनप्‍याजे ने अपने प्रयोग किस-किस पर किये।
उत्‍तर – जीनप्‍याजे ने अपने प्रयोग अपनी दो पुत्री व एक पुत्र पर किये ।

प्रश्‍न 53 – वह कौन मनोवैज्ञानिक है जो पहले जीवविज्ञान के प्रोफेसर थे बाद मे मनोविज्ञान के प्रोफेसर बने ।
उत्‍तर – जीनप्‍याजे

प्रश्‍न 54 – स्‍कीमा सिद्धान्‍त के जनक कौन है।
उत्‍तर – जीनप्‍याजे

प्रश्‍न 55 – कोहलर किस समप्रदाय के समर्थक थे।
उत्‍तर – संज्ञानवादी

प्रश्‍न 56 – कोहलबर्ग का विकास सिद्धांत किससे संबंधित है।
उत्‍तर – नैतिक विकास

प्रश्‍न 57 – ................ के अतिरिक्‍त बुद्धि के निम्‍नलिखित पक्षों को स्‍टर्नबर्ग के त्रितंत्र सिद्धांत में संबोधित किया गया है।
उत्‍तर – सामाजिक

प्रश्‍न 58 – थ, फ, च ध्‍वनियॉं है।
उत्‍तर – स्‍वनिम

प्रश्‍न 59 – बालकों की सोच अमूर्तता की अपेक्षा मूर्त अनुभवों एवं प्रत्‍ययों से होती है। यह अवस्‍था है-
उत्‍तर – 7 से 12 वर्ष तक

प्रश्‍न 60 – मानव विकास किन दोनों योगदान का परिणाम है।
उत्‍तर – वंशानुक्रम एवं वातावरण का

प्रश्‍न 61 – निम्‍न में से कौन पियाजे के अनुसार बौद्धिक विकास का निर्धारक तत्‍व नही है।
उत्‍तर – सामाजिक संचरण

प्रश्‍न 62 – समस्‍या के अर्थ को जानने की योग्‍यता, वातावरण के दोषों, कमियों एवं रिक्तियों के प्रति सजगता वि‍शेषता है।
उत्‍तर – सृजनशील बालकों की

प्रश्‍न 63 – एक क्रिकेट खिलाड़ी अपनी गेंदबाजी के कौशल को विकसित कर लेता है, पर यह उसके बल्‍लेबाली के कौशल को प्रभावित नही करता। इसे कहते है-
उत्‍तर – शून्‍य प्रशिक्षण अंतरण

प्रश्‍न 64 – गिलफोर्ड ने ‘अभिसारी चिंतन’ पद का प्रयोग किसके समान अर्थ में किया जाता है।
उत्‍तर – सृजनात्‍मकता

प्रश्‍न 65 – व्‍यक्ति एवं बुद्धि में वंशानुक्रम की -
उत्‍तर – नाममात्र की भूमिका है।

प्रश्‍न 66 – जिन इच्‍छाओं की पूर्ति नही होती, उनमें से भंडारगृह किसका है।
उत्‍तर – इदम्

प्रश्‍न 67 – बालक के सामाजिक विकास में सबसे महत्‍वपूर्ण कारक कौन सा है।
उत्‍तर – वातावरण

प्रश्‍न 68 – लड़कियों में बाह्य परिवर्तन किस अवस्‍था में होने लगता है।
उत्‍तर – किशोरावस्‍था

प्रश्‍न69 – भाषा विकास के क्रम में अंतिम क्रम है-
उत्‍तर – भाषा विकास की पूर्णावस्‍था

प्रश्‍न 70 – विकासात्‍मक बालमनोविज्ञान का जनक किसे माना गया है।
उत्‍तर – जीन पियाजे को

प्रश्‍न 71 – संवेगात्मक स्थिरता का लक्षण है-
उत्‍तर – समायोजित

प्रश्‍न 72 – संवेग शब्‍द का शाब्दिक अर्थ है-
उत्‍तर – उत्‍तेजना या भावों में उथल पुथल

प्रश्‍न 73 – लैमार्क ने अध्‍ययन किया था -
उत्‍तर – वंशानुक्रम का

प्रश्‍न 74 – बालक के सामाजिकरण का प्रथम घटक है।
उत्‍तर – परिवार

प्रश्‍न 75 – प्राकृतिक चयन के सिद्धांत का संबंध है।
उत्‍तर – डार्विन से

प्रश्‍न 76 – अब शिक्षा हो गई है।
उत्‍तर – बाल केन्द्रित 

प्रश्‍न 77 – पैतृक गुणों के हस्‍तांतरण के सिद्धांतों को स्‍पष्‍ट किया था।
उत्‍तर – मैण्‍डल ने

प्रश्‍न 78 – ‘बालक की अभिबृद्धि जैवकीय नियमों के अनुसार होती है’ यह कथन है-
उत्‍तर – क्रोगमैन का

प्रश्‍न 79 – बालविकास का अर्थ है।
उत्‍तर – बालक का गुणात्‍मक   परिमाणात्‍मक परिवर्तन

प्रश्‍न 80 – अधिगम का पुनरावृत्ति का सिद्धांत दिया है।
उत्‍तर – पैट्रिक पावलाव ने

Tuesday, January 16, 2018

कम्प्यूटर महत्वूवर्ण

                             उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती हेतु कम्पुटर विषय  महत्वपूर्ण नोट्स 
                                                                                              सलमान आरफ़ी !!                                         मित्रों पढने के बाद blog को फॉलो अवश्य करे व् फेसबुक पर भी पेज को like करे          

कम्प्यूटर सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
1. सेविंग की प्रक्रिया है – मेमोरी से स्टोरेज माध्यम तक दस्तावेज कॉपी करना
2. डाइरेक्टरी के अंदर की डाइरेक्टरी को कहा जाता है – सब डाइरेक्टरी
3. C.A.D. का तात्पर्य है – कंप्यूटर एडेड डिजाइन
4. ओरेकल है – डाटाबेस सॉफ्टवेयर
5. असेम्बलर का कार्य है – असेम्बली भाषा को यंत्र भाषा में परिवर्तित करना
6. भारत में सर्वप्रथम दिखाई देने वाला कंप्यूटर वाइरस है – सी-ब्रेन
7. उस नेटवर्क टोपोलॉजी का क्या नाम है, जिसमें प्रत्येक संभावित नोड में द्विदिशीय कड़ियां हैं? – मेश
8. वह बिंदु जिस पर डाटा कंप्यूटर में प्रवेश करता है या निकलता है – टर्मिनल
9. विश्व का प्रथम कंप्यूटर नेटवर्क माना जाता है – ARPANET
10. लिनक्स एक उदाहरण है – ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का
11. पहले से चल रहे कंप्यूटर को रीस्टार्ट करना कहलाता है – रीबूटिंग
12. सॉफ्टवेयर कोड में त्रुटियां ढूंढ़ने की प्रक्रिया को कहा जाता है – डीबगिंग
13. सीपीयू का वह भाग जो अन्य सभी कंप्यूटर कंपोनेन्टस की गतिविधियों को कोआर्डिनेट करता है – कंट्रोल यूनिट
14. कंप्यूटर में जाने वाले डेटा को कहते हैं – इनपुट
15. कंप्यूटर में डेटा किसे कहा जाता है? – चिन्ह व संख्यात्मक सूचना को
16. A.L.U. का पूरा नाम होता है – Arithmetic logic unit
17. कंप्यूटर का नियंत्रक भाग कहलाता है – सी. पी. यू.
18. कंप्यूटर के सभी भागों के बीच सामंजस्य स्थापित करता है – कंट्रोल यूनिट
19. माइक्रोप्रोसेसर जो कंप्यूटर का मस्तिष्क होता है, उसे कहा जाता है – माइक्रोचिप
20. ALU परिचालन संपन्न करता है – अर्थमैटिक
21. एक हार्डवेयर डिवाइस जो डाटा को अर्थपूर्ण इनफार्मेशन में परिवर्तित करता है – प्रोसेसर
22. CRAY क्या है? – सुपर कंप्यूटर
23. टेलीप्रोसेसिंग तथा टाइमशेयरिंग का प्रयोग किस पीढ़ी के कंप्यूटर में हुआ? – तृतीय पीढ़ी
24. वह उपकरण जो हैन्डहेल्ड ऑपरेटिंग प्रणाली का इस्तेमाल करता है? – पीडीए
25. कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं? – दो प्रकार के
26. प्वाइंट एंड ड्रॉ डिवाइस कहा जाता है – माउस को
27. ट्रैक बाल उदाहरण है – पॉइंटिंग डिवाइस
28. सॉफ्ट कॉपी एक आउटपुट है, तो हार्ड कॉपी क्या है? – प्रिंटेड आउटपुट
29. सेकंडरी स्टोरेज मीडिया से हार्डडिस्क में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों को कॉपी करने की प्रक्रिया को 
कहते हैं – इनस्टॉलेशन
30. किस मेमोरी में रखा डाटा बिजली जाते ही समाप्त हो जाता है? – रैम
31. डीवीडी उदाहरण है – ऑप्टिकल डिस्क
32. CD-RW का पूरा नाम है – Compact Disc rewritable
33. सूचनाएं एक यूनिट से दूसरी यूनिट तक ले जाने व उन्हें वापस लाने का काम कौन करता 
है? – डाटा बेस
34. कंप्यूटर में अनवरत विद्युत आपूर्ति का संक्षिप्त रूप क्या है? – यू. पी. एस.
35. मदरबोर्ड में क्या रहता है जो मदरबोर्ड पर सीपीयू को दूसरे पुर्जों से जोड़ता है? – सिस्टम बस
36. प्रथम गणना यंत्र है – अबैकस
37. विंडोज डम् में, डम् से क्या शब्द बनता है? – Millennium
38. मॉड्यूलेटर-डी-मॉड्यूलेटर का सामान्य नाम है – मोडेम
39. पहले से ऑन कंप्यूटर को रीस्टार्ट करने को क्या कहते हैं? – वार्म बूटिंग
40. HTML डॉक्युमेंट बनाने के लिए किसकी जरूरत होती है? – टैक्स्ट एडीटर की
41. कंप्यूटर से अधिकाश प्रोसेसिंग होती है – सीपीयू में
42. वेबसाइट कलेक्शन है – वेब पेजेस का
43. किस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को ट्रांसलेटर की जरूरत नहीं होती है? – मशीन लैंग्वेज
44. एक्सेल स्प्रेडशीट का एक्स्टेंशन है – .xls
45. फाइल एक्सटेंशन किसलिए इस्तेमाल होते हैं? – फाइल टाइप को आइडेंटिफाई करने के 
लिए
46. एक्सेल वर्कबुक संग्रह है – वर्कशीट का
47. ई-मेल पते के दो भाग कौन-से होते हैं? – प्रयोक्ता का नाम और डोमेन नंबर
48. कैड शब्द का संबंध कंप्यूटर में किससे हैं? – डिजाइन से
49. भारत में निर्मित प्रथम कंप्यूटर का नाम क्या है? – सिद्धार्थ
50. कंप्यूटर प्रोग्रामों को हाई-लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के रूप में लिखा जाता है। मानव द्वारा 
पढ़े जाने योग्य प्रोग्राम के अनुवाद को कहा जाता है – सोर्स कोड
51. C, BASIC, COBOL और JAVA जिस भाषा के उदाहरण हैं, उसे कहते हैं – हाई-लेवल
52. ASCII का पूर्ण रूप होता है – American Standard Code for Information 
Interchange
53. कंप्यूटर का पितामह कहा जाता है – चार्ल्स बेबेज
54. सर्वप्रथम आधुनिक कंप्यूटर की खोज हुई – 1946 में
55. कंप्यूटर के संचालन में प्रयुक्त प्रोग्राम, नियम तथा कंप्यूटर क्रियाओं से संबंधित अन्य
लिखित सामग्री को कहा जाता है – सॉफ्टवेयर
56. कंप्यूटर के मस्तिष्क को कहा जाता है – सी. पी. यू.
57. इंटीग्रेटेड सर्किट चिप का विकास किसने किया है – जे. एस. किल्बी ने
58. इंटीग्रेटेड सर्किट चिप (I.C.) पर किसकी परत होती है? – सिलिकॉन
59. चुम्बकीय डिस्क पर किस पदार्थ की परत होती है? – आयरन ऑक्साइड
60. कंप्यूटर में किसी शब्द की लम्बाई किसमें मापते है – बिट
61. स्टोरेज माध्यम की क्षमता की इकाई है – बाइट
62. एम एस विंडोज किस प्रकार का सॉफ्टवेयर है? – GUI
63. वह कौन-सा डिवाइस है जो दो या अधिक नेटवर्कों का जोड़ता हैं? – गेटवे
64. कंप्यूटर्स विशिष्टतः किसके साथ कार्य करके, आंकड़ों की सूचना में प्रोसेसिंग करते हैं? – 
नंबर्स
65. निर्माण प्रक्रिया में किस मेमोरी चिप को प्रोग्राम किया जाता है? – ROM
66. एक बाइट का कलेक्शन है – आठ बिट्स
67. CD-ROM किसका उदाहरण है – इनपुट डिवाइस का
68. कम्पाइलर है – स्त्रोत प्रोग्राम का ऑब्जेक्ट कोड में अनुवादक
69. वोलेटिलिटी किसकी प्रोपर्टी है? – रैम
70. जावा उदाहरण है – उच्चस्तरीय भाषा (लैंग्वेज)
71. वह हार्डवेयर डिवाइस जिस आमतौर पर कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है, वह है – 
सीपीयू
72. जब कंप्यूटर दिए गए अनुदेशों पर कार्य करता है, तो उसे कहा जाता है – प्रोसेसिंग
73. वह इनपुट डिवाइस, जो सुपर बाजारों में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है – बार कोड 
रीडर
74. एक कंप्यूटर प्रोग्राम – अनुदेशों का एक ऐसा सेट है, जो समस्या सुझलाने अथवा कार्य के 
निष्पादन में, कंप्यूटर को समर्थ बनाता है।
75. वे टर्मिनल्स जिन्हें पहले कैश रजिस्टर्स कहते थे, प्रायः कॉम्प्लेक्स इन्वेंटरी तथा विक्रय 
कंप्यूटर प्रणालियों से जुड़े होते हैं – प्वाइंट-ऑफ-सेल
76. वायरस, ट्रॉजन होर्सेस तथा वर्म्स – कंप्यूटर प्रणाली को हानि पहुंचाने में सक्षम होते हैं।
77. कंप्यूटर्स डाटा एकत्र करते हैं जिसका अर्थ है कि वे उपयोगकर्ता को अनुमति देते हैं – 
इनपुट की
78. वे कंपोनेंट्स जो आंकड़ों का संसाधन करते हैं, वे स्थित होते हैं – प्रणाली यूनिट
79. सॉफ्टवेयर का अर्थ है – प्रोग्राम
80. दस्तावेज प्रिंट करने की शॉर्टकट की है – Ctrl+P
81. बाइनरी लैंग्वेज में अल्फाबेट का प्रत्येक अक्षर, प्रत्येक अंक तथा प्रत्येक विशेष करेक्टर बना 
होता है – आठ बिट्स के योग से
82. वे ग्राफिकल तस्वीरें जो फाइल, फोल्डर इत्यादि जैसे ऑब्जेक्ट को रिप्रेजेंट करती हैं, 
कहलाती हैं – आइकॉन्स
83. अपनी लागत और आकार के कारण ये कंप्यूटर अपेक्षाकृत विरल (रेअर) हैं – सुपर 
कंप्यूटर्स
84. RAM का पूरा नाम है – रैंडम एक्सेस मेमोरी
85 .विशिष्ट इनपुट अथवा आउटपुट डिवाइस को शेष कंप्यूटर प्रणाली के साथ कम्युनिकेट करने 
की अनुमति प्रदान करने हेतु डिजाइन किए गए स्पेशलाइज्ड प्रोग्रामों को कहा जाता है – 
ऑपरेटिंग सिस्टम
86. इस प्रकार का कंप्यूटर सबसे कम शक्तिशाली है फिर भी इसका सर्वाधिक प्रयोग होता है 
और यह तीव्रतम वृद्धि वाले प्रकार का कंप्यूटर है – मिनी कंप्यूटर
87. कंप्यूटर संसाधनों के प्रबंधन सें संबंधित विशिष्ट कार्य करने के लिए डिजाइन किए गए
प्रोग्रामों को कहा जाता है – ऑपरेटिंग सिस्टम
88. सर्वाधिक शक्तिशाली कंप्यूटर है – सुपर कंप्यूटर
89. ऐसी इंटरनेट सेवा जो उपलब्ध संसाधनों को, मल्टीमीडिया इंटरफेस प्रदान करवाती हो, उसे 
कहते हैं– वर्ल्ड वाइड वेब
90. वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का निर्माण करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है – डॉक्युमेंट्स
91. ऐसी डिवाइस जो केबल के प्रयोग के बिना ही नेटवर्क से जोड़ती हो, इसे कहा जाता है –
वायरलेस
92. मेन्यू भाग होते हैं – स्टेट्रस बार का
93. वेबसाइटों को देखने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले प्रोग्राम को कहते हैं – ब्राउजर
94. एक ही समय में विभिन्न प्रकार के कितने डॉक्युमेंट्स को आप खुला रख सकते हैं? – इतने 
अधिक जितने कि आपकी कंप्यूटर मेमोरी होल्ड कर सकती है
95. GUI का पूर्ण रूप है – ग्राफिकल यूजर इंटरफेस
96. वेब पेज में वह कौन-सा शबद है जिसे क्लिक किया जाए, तो दूसरा डॉक्यूमेंट खुलता है? – 
हाइपरलिंक
97. सीपीयू में होता है – एक कंट्रोल यूनिट और एक अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट
98. कंप्यूटर बूट नहीं कर सकता यदि, उसमें नहीं होगी – ऑपरेटिंग प्रणाली
99. रीड ओनली मेमोरी (ROM) की कौन-सी विशेषता उसे उपयोगी बनाती है ? – ROM में
डाटा को खतरा नहीं होता, बिजली न होने पर भी वह उसमें रहता है
100. कंप्यूटर नेटवर्क में कौन-से प्रकार का संसाधन सामान्यतः शेयर किया जाता है – प्रिंटर्स
101. पेज पर कितने मार्जिन होते हैं? – चार
102. एक डिजिटल वाच में किस तरह का कंप्यूटर हो सकता है? – इम्बेडेड कंप्यूटर
103. हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का संयोजन है जो कंप्यूटिंग डिवाइसेज के बीच सूचनाओं के 
आदान-प्रदान को सुगम बनाता है – नेटवर्क
104. डम्ब टर्मिनल क्या है? – सेंट्रल कंप्यूटर
105. इंटरनेट का अर्थ है – नेटवर्कों का बड़ा नेटवर्क
106. बैकअप क्या है? – सिस्टम की इनफॉरमेशन की ठीक वैसी ही प्रतिलिपि
107. वर्ड का वह फीचर जो कुछ स्पैलिंगों, टाइपिंग, कैपिटल अक्षरों या व्याकरण की त्रुटियों को 
अपने आप ठीक कर देता है – ऑटोकरेक्ट
108. स्टोरेज डिवाइस पर जो मुख्य फोल्डर होता है, उसे क्या कहा जाता है? – रूट डाइरेक्टरी
109. वह चीज, जो निर्देशों को सरलता से समझ गई है, कहलाती है – यूजर फ्रेंडली
110. वे विशिष्ट प्रोग्राम जो वेब पर आवश्यक सामग्री को ढूंढ़ने में उपयोगकर्ता की मदद करते 
हैं, कहलाते हैं – सर्च इंजन
111. वर्ड में किसी डॉक्यूमेंट में किसी विशिष्ट शब्द या मुहावरे को ढूंढ़ने के लिए सबसे सरल
और त्वरित तरीका है – फाइंड कमांड का उपयोग करना
112. इंटरनेट पर सर्वर से कंप्यूटर द्वारा सूचना प्राप्त किए जाने की प्रक्रिया को कहते हैं –
डाउनलोडिंग
113. ब्रोशर, पोस्टर और न्यूजलैटर बनाने के लिए किस प्रकार का सॉफ्टवेयर सबसे ज्यादा 
उपयोगी है? – डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर
114. चैट क्या है? – टाइप की हुई बातचीत जो कंप्यूटर पर घटित होती है
115. अरिथमेटिक ऑपरेशन – में जमा, घटाना, गुणा और भाग शामिल है।
116. स्लाइड शो बनाने के लिए किस एप्लीकेशन का इस्तेमाल होता है? – पावरप्वाइंट
117. जंक ई-मेल का अन्य नाम है? – स्पैम
118. ई-कॉमर्स के जरिए क्या संभव है? – इंटरनेट पर बिजनेस करना
119. वर्तमान डॉक्युमेंट में बदलाव क्या कहलाता है? – एडिटिंग
120. आपस में संबंधित फाइलों का संग्रह क्या कहलाता है? – रिकॉर्ड
121. अपनी स्थिति से हिलाए न जा सकने वाला मॉडेम क्या कहलाता है? – फिक्सड मॉडेम
122. किसी डिवाइस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी कैरेक्टर्स को क्या कहते है? –
कैरेक्टर सेट
123. ईमेल एड्रेस याद करने से बचने के लिए क्या इस्तेमाल करना चाहिए? – एड्रेसबुक
124. मॉडेम का कनेक्शन किसके साथ किया जाता है? – फोनलाइन
125. कंप्यूटर से जुड़े KB का क्या अर्थ है? – किलोबाइट
126. डाटा प्रोसेसिंग का क्या अर्थ है? – वाणिज्यिक उपयोग के लिए जानकारी तैयार करना
127. प्रोसेस्ड डेटा को क्या कहते हैं? – आउटपुट
128. सीपीयू के एएलयू में होते हैं – रजिस्टर
129. प्रोसेसर के तीन मुख्य भाग होते हैं – ALU, कंट्रोल यूनिट और रजिस्टर
130. माइक्रोप्रोसेसर जो कंप्यूटर का मस्तिष्क होता है, उसे कहा जाता है – माइक्रोचिप
131. माइक्रो प्रोसेसर किस पीढ़ी का कंप्यूटर है? – चतुर्थ
132. कंप्यूटर का जनक किसे कहा जाता है? – चार्ल्स बैवेज
133. चुम्बकीय डिस्क पर किस पदार्थ की परत होती है? – आयरन ऑक्साइड
134. एक्सपैंशन कार्ड में इन्सर्ट किए जाते हैं – स्लॉट
135. इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेन्ट वाले थिन प्लेट या बोर्ड को कहते हैं – सर्किट बोर्ड
136. वह सर्किट बोर्ड जिसमें सीपीयू और अन्य चिप होते हैं, उसे कहा जाता है – मदरबोर्ड
137. विशेष प्रकार के संगीत उपकरणों को साउंड कार्डों से कौन-सा पोर्ट जोड़ता है? – MIDI
138. पास्कल है – कंप्यूटर की एक भाषा
139. प्रोग्रामन हेतु विकसित की गई सर्वप्रथम भाषा कौन है? – फोरट्रॉन
140. वे वड्र्स जिन्हें प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ने अपने स्वयं के उपयोग हेतु अलग रखा है – रिजर्वड 
वड्र्स
141. प्रोग्राम हेतु विकसित की गई सर्वप्रथम भाषा – फोरट्रॉन
142. वे वड्र्स जिन्हें प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ने अपने स्वंय के उपयोग हेतु अलग रखा है – रिजर्वड 
वड्र्स
143. प्रोग्राम हेतु विकसित की गई सर्वप्रथम भाषा – फोरट्रॉन
144. किसी प्रोग्राम का चित्र के रूप में प्रदर्शन कहलाता है – फ्लोचार्ट
145. कंप्यूटर भाषा FORTRAN किस क्षेत्र में उपयोगी है? – विज्ञान
146. कंप्यूटर भाषा COBOL किसके लिए उपयोगी है? – व्यावसायिक कार्य
147. मशीन लैंग्वेज प्रयोग करती है – न्यूमैरिक कोड
148. मल्टीमीडिया वेबपेज वेबसाइट और वेब आधारित एप्लिकेशन विकसित करने के लिए 
सबसे लोकप्रिय लैंग्वेज होती है – जावा
149. इंटरनेट में प्रयुक्त कंप्यूटर लैंग्वेज है – जावा
150. यूनिक्स नामक ऑपरेटिंग प्रणाली विशेष रूप में प्रयोग में लाई जाती है – वेब सर्वर्स में
151. किस प्रिंटर द्वारा एक स्ट्रोक में एक अक्षर प्रिंट होता है? – डाट मैट्रिक्स प्रिंटर
152. कम्पाइलर कंप्यूटर की किस प्रकार की भाषा है? – निम्नस्तरीय भाषा
153. कौन-सा सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के हार्डवयेर को नियंत्रित करता है? – सिस्टम
154. कंप्यूटर में काम करने के लिए किस सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है? – एप्लिकेशन
155. स्प्रेडशीट में जिस प्वाइंट पर कॉलम और रोइंटरसेक्ट करते हैं, उसे क्या कहते हैं? –
Cell
156. ट्रैकबॉल किसका उदाहरण है? – प्वाइंटिंग डिवाइस
157. यदि आपका कंप्यूटर खुद को रीबूट करता रहता हैं तो संभावना है कि – इसमें वायरस हैं
158. कमांडो की वे सूचियां जो स्क्रीन पर प्रकट होती हैं – मीनू
159. हार्ड डिस्क से डिलीट की गई फाइलें कहाँ भेजी जाती हैं? – रीसाइकिल बिन
160. E.D.P. क्या है? – इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग
161. भारत में निर्मित परम कंप्यूटर किस प्रकार का कंप्यूटर है? – सुपर कंप्यूटर
162. माइक्रोप्रोसेसर किस पीढ़ी का कंप्यूटर है? – चतुर्थ
163. की बोर्ड में ‘फक्शन-की’ की संख्या कितनी होती है? – 12
164. कंप्यूटर से पढ़े जाने वाले अलग-अलग लंबाई-चौ ड़ाई की लाइनों वाले कोड को कहते हैं – 
बार कोड
165. किस प्रिंटर द्वारा स्ट्रोक से अक्षर प्रिंट होता है? – डाट मैट्रिक्स प्रिंटर
166. इंटरनल स्टोरेज किस प्रकार का स्टोरेज है? – प्राइमरी
167. सेल फोनों में किस प्रकार के स्टोरेज डिवाइसों का उपयोग किया जाता है? – फ्लैश
168. डिस्क को ट्रैकों और सेक्टरों में विभाजित करने की प्रक्रिया क्या है? – फार्मेटिंग
169. रैम वोलाटाइल मेमोरी है क्योंकि – डाटा रिटेन करने के लिए इसे सतत पावर सप्लाई
की जरूरत होती है
170. प्रोग्रामों का सेट, जो निर्माण के समय कंप्यूटर के रीड ओनली मेमोरी में प्री-इन्स्टाल होता 
है –फर्मवेयर
171. भाषा जिसे कंप्यूटर बिना ट्रांसलेशन प्रोग्राम के समझता है, कहलाती है – मशीनी भाषा
172. स्टोरेज का सबसे बड़ा यूनिट – टेरा बाइट
173. आठ लगातार बिटों की सीरीज को क्या कहा जाता है? – बाइट
174. प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर प्रयोग करते थे – वैक्यूम ट्यूब
175. कंप्यूटर वाइरस केवल एक प्रकार का सॉफ्टवेयर है, जो मुख्यतया नष्ट करते हैं – प्रोग्रामों 
को
176. गूगल क्या है? – सर्च इंजन
177. आधुनिक डिजिटल कंप्यूटरों में किस पद्धति का उपयोग किया जाता है? – द्वि-आधारी 
अंक पद्धति
178. अरनेट क्या है? – एक कंप्यूटर नेटवर्क
179. नई स्लाइड के लिए कीबोर्ड शॉर्टकट क्या है? – Ctrl+N
180. परस्पर संबंधित रिकॉर्ड के समूह को कहते हैं – डाटाबेस
181. xls एक्सटेंशन का प्रयोग किस तरह की फाइलों के लिए किया जाता है? – एक्सेल
182. ओपन, प्रिंट और सेव सभी बटन स्थित होते हैं – स्टैंडर्ड टूल बार पर
183. स्प्रेडशीट में जिस प्वाइंट पर कॉलम और रो इंटरसेक्ट करते हैं, उसे कहते हैं – सेल
184. वर्ड डाक्यूमेंट का डिफाल्ट फाइल एक्सटेंशन क्या है? – DOC
185. टास्कबार स्थित होता है – स्क्रीन के बॉटम पर
186. कंप्यूटर के स्क्रीन पर ब्लिंक करने वाले प्रतीक को कहते हैं – कर्सर
187. जंक ई-मेल को कहते हैं – स्पैम
188. URL क्या होता है? – वर्ल्ड वाइड वेब पर डाक्युमेंट या पेज का एड्रेस
189. फाइलों को ट्रांसफर करने और संदेशों का आदान-प्रदान करने के लिए किस यूटिलिटी
का प्रयोग होता है – ई-मेल
190. शिक्षा संस्थान सामान्यतया अपने डोमेन नाम में किसका प्रयोग करता है? – .edu
191. ई-कॉमर्स क्या है? – इंटरनेट पर उत्पादों तथा सेवाओं का क्रय व विक्रय
192. इंटरनेट से संबंधित एफ.टी.पी. शब्द का मतलब है – फाइल ट्रान्सफर प्रोटोकॉल
193. भारत में इंटरनेट की शुरुआत कब हुई? – 15 अगस्त, 1995
194. भारत में सर्वप्रथम किस राज्य ने इंटरनेट पर टेलीफोन डायरेक्टरी उपलब्ध कराई है? – 
सिक्किम
195. MICR में C का पूरा नाम क्या है? – कैरेक्टर
196. OCR का पूर्ण रूप क्या है? – Optical Character Recognition
197. कितने किलोबाइट मसे एक मेगाबाइट बनता है? – 1024
198. बाइनरी सिस्टम एक नंबर सिस्टम है जिसका आधार है – 2
199. ASCII में कैरेक्टर निर्मित किए जा सकते हैं – 256
200. वर्चुअल मेमोरी क्या होती है? – हार्ड डिस्क की मेमोरी जिसे CPU एक्सटेंडेड रैम की तरह प्रयोग करता है

Friday, December 15, 2017

जोग प्रपात कर्नाटक

शिक्षक भर्ती हेतु महत्वपूर्ण

भारत का सबसे ऊंचा जल प्रपात

जोग प्रपात कर्नाटक 

Sunday, December 3, 2017

व्यगोटिसकी के सिद्दांत

     शिक्षक भर्ती 2018 हेतु महत्वपूर्ण 

            लिव वाइगोत्सकी

लिव वाइगोत्सकी (Lev Vygotsky)

जन्म
19 नवम्बर 1896
Orsha, Russian Empire, now in Belarus
मृत्यु
जून 11, 1934 (उम्र 37)
Moscow, Soviet Union
क्षेत्र
उल्लेखनीय शिष्य
प्रसिद्धि
प्रभाव
प्रभावित
लिव सिमनोविच वाइगोत्सकी (रूसी : Лев Семёнович Вы́готский or Выго́тский, जन्मनाम: Лев Симхович Выгодский ; 1896 - 1934) सोवियत संघ के मनोवैज्ञानिक थे तथा वाइगोत्स्की मण्डल के नेता थे। उन्होने मानव के सांस्कृतिक तथा जैव-सामाजिक विकास का सिद्धान्त दिया जिसे सांस्कृतिक-ऐतिहासिक मनोविज्ञान कहा जाता है।
उनका मुख्य कार्यक्षेत्र विकास मनोविज्ञान था। उन्होने बच्चों में उच्च संज्ञानात्मक कार्यों के विकास से सम्बन्धित एक सिद्धान्त प्रस्तुत किया। अपने करीअर के आरम्भिक काल में उनका तर्क था कि तर्क-शक्ति का विकास चिह्नों एवं प्रतीकों के माध्यम से होता है।
वाइगोत्स्की का सामाजिक दृषिटकोण संज्ञानात्मक विकास का एक प्रगतिशील विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वस्तुत: वाइगोत्सकी ने बालक के संज्ञानात्मक विकास में समाज एवं उसके सांस्कृतिक संबन्धों के बीच संवाद को एक महत्त्वपूर्ण आयाम घोषित किया। ज़ाँ प्याज़े की तरह वाइगोत्स्की भी यह मानते थे कि बच्चे ज्ञान का निर्माण करते हैं। किन्तु इनके अनुसार संज्ञानात्मक विकास एकाकी नहीं हो सकता, यह भाषा-विकास, सामाजिक-विकास, यहाँ तक कि शारीरिक-विकास के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में होता है।[1]
वाइगोत्सकी के अनुसार बच्चे के संज्ञानात्मक विकास को समझने के लिए एक विकासात्मक उपागम की आवश्यकता है जो कि इसका शुरू से परीक्षण करे तथा विभिन्न रूपों में हुए परिवर्तन को ठीक से पहचान पाए। इस प्रकार एक विशिष्ट मानसिक कार्य जैसे- आत्म-भाषा को विकासात्मक प्रक्रियाओं के रूप में मूल्यांकित किया जाए, न कि एकाकी रूप से।
वाइगोत्सकी के अनुसार संज्ञानात्मक विकास को समझने के लिए उन औजारों का परीक्षण अति आवश्यक है जो संज्ञानात्मक विकास में मध्यस्थता करते हैं तथा उसे रूप प्रदान करते हैं। इसी के आधार पर वे यह भी मानते हैं कि भाषा संज्ञानात्मक विकास का महत्त्वपूर्ण औजार है। इनके अनुसार आरमिभक बाल्यकाल में ही बच्चा अपने कार्यों के नियोजन एवं समस्या समाधान में भाषा का औजार की तरह उपयोग करने लग जाता है।
वायगास्की का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त
वायगास्की ने सन 1924-34 में इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलाजी (]]मास्को]]) में अध्ययन किया। यहां पर उन्होंने संज्ञानात्मक विकास पर विशेष कार्य किया, विशेषकर भाषा और चिन्तन के सम्बन्ध पर। उनके अध्ययन में संज्ञान के विकास के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारकों के प्रभाव का वर्णन किया गया है। वायगास्की के अनुसार भाषा समाज द्वारा दिया गया प्रमुख सांकेतिक उपकरण है जो कि बालक के विकास में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
जिस प्रकार हम जल के अणु का अध्ययन उसके भागों (H & O) के द्वारा नहीं कर सकते, उसी प्रकार व्यक्ति का अध्ययन भी उसके वातावरण से पृथक होकर नही किया जा सकता। व्यक्ति का उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राजनैतिक सन्दर्भ में अध्ययन ही हमें उसकी समग्र जानकारी प्रदान करता है। वायगास्की ने संज्ञानात्मक विकास के अध्ययन के दौरान प्याजे का अध्ययन किया और फिर अपना दृष्टिकोण विकसित किया।
प्याज़े के अनुसार विकास और अधिगम (सीखना) दो अलग धारणाएं हैं जिनमें संज्ञान भाषा के विकास को एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में प्रभावित करता है। विकास हो जाने के पश्चात् उस विशेष अवस्था में आवश्यक कौशलों की प्राप्ति ही अधिगम है। इस प्रकार प्याजे के सिद्धान्त के अनुसार विकास, अधिगम की पूर्वावस्था है न कि इसका परिणाम। अर्थात् अधिगम का स्तर विकास के ऊपर हैप्याज़े के अनुसार अधिगम के लिए सर्वप्रथम एक निश्चित विकास स्तर पर पहुंचना आवश्यक है।
वायगास्की के अनुसार अधिगम और विकास की पारस्परिक प्रक्रिया में बालक की सक्रिय भागीदारी होती है जिसमें भाषा का संज्ञान पर सीधा प्रभाव होता है। अधिगम और विकास अन्तर्सम्बन्धित प्रक्रियाएं है जो छात्र के जीवन के पहले दिन से प्रारम्भ हो जाती हैं। वायगास्की के अनुसार विभिन्न बालकों के अलग-अलग विकास स्तर पर अधिगम की व्यवस्था समरूप तो हो सकती है किन्तु एकरूप नहीं, क्योंकि सभी बच्चों का सामाजिक अनुभव अलग होता है। उनके अनुसार अधिगम विकास को प्रेरित करता है। उनका यह दृष्टिकोण प्याज़े के सिद्धान्त एवं अन्य सिद्धान्तों से भिन्न है।
वायगास्की अपने सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धान्त के लिए जाने जाते है। इस सिद्धान्त के अनुसार सामाजिक अन्तःक्रिया (इन्तरैक्शन) ही बालक की सोच व व्यवहार में निरन्तर बदलाव लाता है जो एक संस्कृति से दूसरे में भिन्न हो सकता है। उनके अनुसार किसी बालक का संज्ञानात्मक विकास उसके अन्य व्यक्तियों से अन्तर्सम्बन्धों पर निर्भर करता है।
वायगास्की ने अपने सिद्धान्त में संज्ञान और सामाजिक वातावरण का सम्मिश्रण किया। बालक अपने से बड़े और ज्ञानी व्यक्तियों के सम्पर्क में आकर चिन्तन और व्यवहार के संस्कृति अनुरूप तरीके सीखते है। सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धान्त के कई प्रमुख तत्व है। प्रथम महत्वपूर्ण तत्व है- व्यक्तिगत भाषा। इसमें बालक अपने व्यवहार को नियंत्रित और निर्देशित करने के लिए स्वयं से बातचीत करते है।
सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धान्त का दूसरा महत्वपूर्ण तत्व है- निकटतम विकास का क्षेत्र।
वायगास्की ने शिक्षक के रूप में अनुभव के दौरान यह जाना है कि बालक अपने वास्तविक विकास स्तर से आगे जाकर समस्याओं का समाधान कर सकते है यदि उन्हें थोड़ा निर्देश मिल जाए। इस स्तर को वायगास्की ने सम्भावित विकास कहा। बालक के वास्तविक विकास स्तर और सम्भावित विकास स्तर के बीच के अन्तर/क्षेत्र को वायगास्की ने निकटतम विकास का क्षेत्र कहा।



पियाजे ,कोहाल्बर्ग,एवं व्यगोस्तकी

संज्ञानात्मक विकास का अर्थ- संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के अन्तर्गत बच्चे का चिंतन, बु(ि तथा भाषा में परिवर्तन आता है। इन तीनों परिवर्तनों में संवेदन, प्रत्यक्षीकरण, प्रतिमा-धरणा, धरणा, प्रत्याàान, समस्या-समाधन, चिन्तन, प्रक्रिया, तर्क-शकित जैसी महत्त्वपूर्ण प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। संज्ञानात्मक विकास प्रक्रियाएँ ही विकासमान बालक को कविताएँ याद करने, गणित की समस्या को हल करने के तरीके के बारे में सोचने व निर्णय लेने, कोर्इ अच्छी व सृजनात्मक रणनीति बनाने व क्रमागत अर्थपूर्ण वाक्य बनाने जैसे कायो± हेतु योग्य बनाती हैं। इस प्रकार संज्ञानात्मक विकास से तात्पर्य बालकों में संवेदी सूचनाओं को ग्रहण करके उस पर चिन्तन करने तथा क्रमिक रूप से उसे इस लायक बना देने से होता है जिसका प्रयोग विभिन्न परिसिथतियों में करके वे तरह-तरह की समस्याओं का समाधन आसानी से कर सकते हैं।
1. जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सि(ान्त-
जीन पियाजे (1896-1980)एक प्रमुख सिवस मनोवैज्ञानिक थे। जिन्होंने प्राणि-विज्ञान में शिक्षा प्राप्त की थी। अल्पेफड बिने के साथ (1922-23)बु(ि-परीक्षणों पर कार्य करते समय ही उन्होंने बालकों के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया।
वस्तुत: पियाजे ने बालक के संज्ञानात्मक विकास के संदर्भ में शिक्षा मनोविज्ञान में क्रांतिकारी संकल्पना को उदघाटित किया है। जिसके परिणामस्वरूप इन्हें प्रतिषिठत नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पियाजे ने अधिगम के व्यवहारवादी सि(ान्तों की आलोचना करते हुए संज्ञानात्मक विकास का गत्यात्मक माडल प्रस्तुत किया जिसे कन्स्ट्रटिविजम, के नाम से जाना जाता है।
जीन पियाजे के अनुसार मनुष्य आरंभिक बाल्यावस्था से ही क्रियात्मक तथा स्वतंत्रा अर्थ-रचियता होता है जो स्वयं ज्ञान का निर्माण करता है न कि उसे दूसरों से ग्रहण करता है। तथा उसका बौ(िक विकास उसके स्वयं की बौ(िक क्रियाओं द्वारा प्रभावित होता है। पियाजे के अनुसार जब बच्चे अपने चारों के ज्ञान को संगठित करने का प्रयास करते है तो इस दौरान- बच्चे मुख्यत: बाá वस्तुओं पर अपने द्वारा की गर्इ क्रिया द्वारा सीखते तथा विचारों की श्रेणियों का निर्माण करते हैं। बच्चे सतत रूप से नए ज्ञान व कौशलों संबंध्ी सूचनाओं केा इकटठा करते रहते हैं इन सूचनाओं को क्रमगत जटिल सुसंगत तथा अपनी समझ के पूर्ण ढ़ाँचे में समायोजित करने में लगातार प्रयासरत रहते हैं। पियाजे के अनुसार बच्चा अपने वातावरण के साथ इस अन्तक्र्रिया के परिणामस्वरूप ही सीखता है। संज्ञानात्मक विकास से तात्पर्य चिंतन में गुणात्मक  परिवर्तन से है तथा यह परिवर्तन पहले से उपसिथत संज्ञानात्मक संरचनाओं में अनुकूलन द्वारा होता है। यह परिवर्तन अपरिहार्य व अपरिवर्तनीय तथा जैव-निर्धरित होता है।
संक्षेप में पियाजे के अनुसार बालकों में वास्तविकता के स्वरूप में चिंतन करने, उसकी खोज करने, उसके बारे में समझ बनाने तथा उनके बारे में सूचनाएँ एकत्रित करने की क्षमता, बालक के परिपक्वता स्तर तथा बालक के अनुभवों की पारस्परिक अन्त: क्रिया द्वारा निèर्ाारित होती है।
बालक अपने विश्व की ज्ञान रचना में 'स्कीमा का प्रयोग करता है। 'स्कीमा से तात्पर्य ऐसी मानसिक संरचना से है जो व्यकित विशेष के मसितष्क में सूचनाओं को संगठित तथा व्याख्यायित करने हेतु विधमान होती है। यह 'स्कीमा दो प्रकार का होता है पहला साèाारण तथा दूसरा जटिल। साधरण 'स्कीमा मोटरकार या खिलौने के 'स्कीमा से समझा जा सकता है। इसी प्रकार अंतरिक्ष का निर्माण कैसे हुआ का 'स्कीमा, जटिल 'स्कीमा का उदाहरण होगा।
पियाजे के अनुसार बच्चे 'स्कीमा के संशोधित व समायोजित करने में दो प्रक्रियाओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।
(1)आत्मसातीकरण- वह प्रक्रिया है जिसमें बालक नए ज्ञान को पूर्ण ज्ञान योजनाओं में शामिल कर लेता है, अर्थात बालक नए ज्ञान का आत्मसात अपने पुराने 'स्कीमा में कर लेता है।
(2)समायोजन -वह मानसिक प्रक्रिया है जिसमें बालक नर्इ सूचना के अनुसार समायोजन करता है अर्थात 'स्कीमा को वातावरण के अनुसार समायोजित कर लेता है। साथ ही जब बालक के सामने ऐसी परिसिथति या समस्या आती है, जिसका उसे कभी अनुभव नहीं हुआ, तो इससे उसमें एक तरह का संज्ञानात्मक असंतुलन उत्पन्न होता जाता है। जिसे दूर करने के लिए या उनमें संतुलन लाने के लिए बालक आत्मसातीकरण या समायोजन या दोनो प्रक्रियाएँ करना आरंभ कर देता है। इस प्रक्रिया को साम्यधरण कहते हैं। इसे पियाजे ने बच्चे द्वारा एक अवस्था से दूसरी अवस्था में पहुँचने की प्रक्रिया को समझाने हेतु प्रयुक्त किया है। पियाजे के अनुसार जब बालक विचारों में असंतुलन से संतुलन की ओर जाता है (साम्यधरण प्रक्रिया द्वारा), तो बालक में संज्ञानात्मक परिवर्तन आता है जो कि गुणात्मक होता है। उदाहरण के लिए अगर बच्चा यह मानता है कि पानी की मात्राा में परिवर्तन केवल इसलिए हो जाता हैं क्योंकि यह एक अलग रूप के बर्तन (छोटे व चौड़े बर्तन से लम्बे व अपेक्षाकृत संकरे)में डाल दिया गया है, अत: इस सिथति में वह बालक हमेशा ही इस बात को लेकर असमंजस की सिथति में होगा कि यह अतिरिक्त या ज्यादा पानी कहाँ से आया? और क्या वास्तव पानी की ज्यादा मात्राा उपलब्ध् है? बच्चे इस असमंजस को तभी सुलझा (कि पानी की मात्राा समान है,)पाते हैं जब उनके विचारों में उच्च क्षमता विकसित हो पाती है।
पियाजे का यह मानना था कि बच्चें ज्ञान के निर्माण में क्रियाशील रहते हैं इसके साथ उनका कहना था कि उनका संज्ञानात्मक विकास चार क्रमागत अवस्थाओं से होकर गुजरता है। प्रत्येक अवस्था आयु-विशेष में होती है तथा प्रत्येक में चिंतन के विशेष प्रकार पाए जाते हैं, और चिंतन का भिन्न एवं उच्च प्रकार ही एक अवस्था को दूसरी अवस्था से अलग व विभेदित करता है। पियाजे के अनुसार केवल सूचनाएँ एकत्राण से बच्चा ऊपरी अवस्था में नहीं पहुँचता अपितु उनका प्रयोग, समस्या समाधन व तर्क देने में कितने बेहतर एवं गुणात्मक रूप से कर पाता है, यह निर्धरित करता है कि वह किस अवस्था में है।
पियाजे द्वारा बालकों के संज्ञानात्मक विकास की व्याख्या हेतु बतार्इ गर्इ चार अवस्थाओं का संक्षेप में विवरण निम्न है:-
1. संवेदी-पेशीय अवस्था (सेंसरी मोटर स्टेज)
यह अवस्था बालक में जन्म से लेकर लगभग 2 वर्ष तक की अवधि में होती है। इस अवस्था में बालक अपनी इनिद्रयों के अनुभवों तथा उन पर पेशीय कार्य करके समझ विकसित करते हैं, (जैसे देखकर छूना, पैर मारना आदि)अत: इसे संवेदी-पेशीय अवस्था कहते हैं।
प्रारंभ में बालक प्रतिवर्ती क्रियाएँ करता है। (जैसे-चूसना)तथा ध्ीरे-ध्ीरे जटिल संवेदी पेशीय कार्य पैटर्न दिखाता है (जैसे चीजों को बार-बार गिराना, जिनके गिरने की आवाज उसे रोचक लगे।
इस अवस्था की सबसे बड़ी उपलबिध् बालक द्वारा वस्तु स्थायित्व (व्इरमबज च्मतउंदंदबम)का संज्ञान होना है। इसके द्वारा बालक यह जान पाता है कि घटनाएँ एवं वस्तुएँ तब भी उपसिथत रहती हैं जब वे हमारे सामने (देखी, सुनी या महसूस)नहीं होती है। साथ ही बालक स्वयं व विश्व में (कि दोनों अलग असितत्व रखते हैं)अन्तर स्पष्ट कर पाने की सिथति में आ जाता है।
2. प्राकसंक्रियात्मक अवस्था-पियाजे के अनुसार दूसरी अवस्था लगभग जो 2 से 7 वर्ष तक होती है। इस अवस्था को पुन: दो भागों में बाँटा जा सकता है। (1)प्राकसंप्रत्यात्मक (2)अन्तर्दर्शी अवधि।
(1)प्राकसंप्रत्यात्मक अवधि-यह अवधि लगभग 2 से 4 वर्ष तक की होती है। इस अवधि में बालक वस्तु सामने उपसिथत न होने पर भी उसकी मानसिक छवि बना लेता है। बालक बाá जगत की विभिन्न वस्तुओं एवं व्यकितयों की मानसिक उपसिथति हेतु। विभिन्न संकेतों का विकास कर लेते है।
भाषा का विस्तृत प्रयोग तथा आभासी क्रियाएँ बच्चों में सांकेतिक विचारों के विकास को दिखाती हैं (जैसे लकड़ी को ट्रक समझकर चलाते हुए खेलना)। बच्चों के द्वारा की गर्इ ड्राइंग में भी उनके द्वारा प्रयोग किए गए संकेतों को देखा जा सकता है।
पियाजे ने इस अवधि की दो परिसीमाएँ भी बतार्इ है आत्मकेनिद्रता और जीववाद। आत्म केनिद्रता से तात्पर्य स्वयं के दृषिटकोण व अन्य के दृषिटकोण में विभेद न कर पाने की सिथति है। उदाहरण के लिए- 4 वर्षीया अनिता जो घर पर है तथा उसकी माँ जो कार्य स्थल से पफोन कर रही हैं, के बीच बातचीत-
- पियाजे के अनुसार सभी बालक इन क्रमागत अवस्थाओं से होकर ही विकसित होते हैं,
- कोर्इ बालकबालिका किसी भी अवस्था को लांघकर आगे नहीं बढ़ सकता। यह हो सकता है कि किसी अवस्था विशेष में वह अन्य बालकों की अपेक्षा थोड़ा जल्दी पूर्ण करके अगली अवस्था में चलाचली जाए।
- पियाजे के अनुसार बालक प्राकृतिक रूप से, प्रगतिशील रूप से (च्तवहतमेेपअमसल)विकसित होता रहता है। उसमें वातावरण से प्रभावित हुए बिना आन्तरिक विकासात्मक प्रक्रिया चलती रहती है।    
माँ- अनिता, क्या घर पर है?
अनिता-(चुपचाप सिर हिलाकर हामी भरती है।)
माँ- क्या मैं भार्इ से बात कर सकती हूँ?
अनिता- (पिफर से सिर हिलाकर)हामी भरती है।
यहाँ पर अनिता सिर हिलाती है क्योंकि उसे लगता है कि माँ को वह दिखार्इ और सुनार्इ पड़ रहा है। वह यह समझ पाने की सिथति में नहीं है कि माँ को उसका सिर हिलाना दिखार्इ नहीं पड़ रहा है।
जीववाद-यह भी प्राकसंक्रियात्मक चिन्तन की एक अन्य सीमा है। इसमें बालक सभी वस्तुओं को 'सजीव समझता है तथा सोचता है कि ये सभी सजीवों की भांति 'कार्य करती हैं। जैसे कहना कि उस पेड़ ने पत्ते को तोड़ दिया और पत्ता नीचे गिर गया जीववाद का उदाहरण है। बच्चा बादल, पंखा, कार आदि को 'सजीव मानता है।
(2)अन्तर्दर्शी अवधि-यह अवधि लगभग 4 साल से 7 साल की होती है। इस अवधि में बच्चे में प्रारंभिक तर्कशकित आ जाती है तथा इससे संबंधित विभिन्न प्रश्नों को जानना चाहता है। पियाजे ने इसे अन्तर्दर्शी अवधि इसलिए कहा है क्योंकि बच्चा इस अवधि में अपने ज्ञान व समझ के बारे में पूर्णतया जानते हैं। किन्तु वो कैसे जानते हैं और क्या जानते हैं इससे कापफी हद तक अनभिज्ञ होते हैं। अर्थात वे बहुत सी बातें जानते हैं किंतु उनमें तर्कसंगत चिन्तन नहीं होता। उदाहरण के लिए वे गणितीय घटाना व गुणा, कर पाते हैं, किन्तु कहाँ प्रयोग करना है और क्यों प्रयोग करना है इसे नहीं समझ पाते हैं।
3. मूर्त संक्रियात्मक की अवस्था-पियाजे के सि(ान्त के अनुसार ज्ञानात्मक विकास की यह तीसरी अवस्था लगभग 7 साल से प्रारंभ होकर 12 साल तक चलती है। हालांकि इस अवस्था में बच्चों के विचारों में संक्रियात्मक क्षमता आ जाती है और अन्तर्दर्शी तर्कशकित की जगह तार्किकता (स्वहपबंस त्मेंवदपदह)आ जाती है। परन्तु बालक समस्या समाधन हेतु मूर्त परिसिथतियों पर ही निर्भर करता है। उदाहरण के लिए दो ठोस वस्तुओं से संबंधित समस्या हेतु बालक आसानी से मानसिक संक्रिया कर लेता है किन्तु यदि उन वस्तुओं को न देकर उनके बारे में शाबिदक कथन दिए जाएँ तो ऐसी समस्याएँ अमूर्त होने के कारण वे इसे हल नहीं कर पाएँगें।
इस अवस्था में बच्चा किसी वस्तु की विभिन्न विशेषताओं पर एक साथ विचार कर सकता है। वे मूर्त संक्रियाँ का मानसिक रूप में व्युत्क्रम कर पाते है। बच्चे यह समझने लगते हैं कि 2 × 2 ¾ 4 हुआ तो 4 ÷ 2 ¾ 2 होगा। इस अवधि के बालक के समस्या-समाधन को देखने हेतु निम्न परीक्षण किया जा सकता है। जैसे पदार्थ के संरक्षण के परीक्षण में बच्चे को मिटटी के दो समान गोले दिखाए जाते हैं। उसमें से एक गोले को लम्बा व पतला आकार का बना देते हैं तत्पश्चात बच्चे से पूछा जाता है कि अब दोनों (मिटटी का मूल गोला एंव लम्बी व पतली आकृति)में से किसमेंं ज्यादा मिटटी है? 8-9 वर्षीय बच्चे आसानी से बता पाते हैं कि मिटटी की मात्राा समान हैं, जबकि प्राकसंक्रियात्मक अवधि के बच्चे लम्बे व पतले में मिटटी की मात्राा ज्यादा बताते हैं। इस समस्या का उत्तर देने में बालक को मानसिक रूप से यह सोचना होता है कि गोले से ही लम्बी व पतली आकृति बनार्इ गर्इ जिससे यदि है, पुन: गोला बनाएंगे तो वह दूसरे गोले के समान ही होगा।
इस समस्या में प्राकसंक्रियात्मक अवस्था का बच्चा केवल एक ही विशेषता, लम्बार्इ या चौड़ार्इ पर ही èयान रखता है जबकि मूर्त संक्रियात्मक अवस्था का बच्चा दोनों विशेषताओं पर èयान रखता है।
पियाजे के अनुसार, इस अवस्था में बालक तीन महत्त्वपूर्ण संप्रत्यय विकसित कर लेते हैं।
संरक्षण बालक तरल, लम्बार्इ, भार इत्यादि के संरक्षण से संबंधित समस्याओं का समाधन करते पाए जाते हैं।
संबंध् क्रमिक संबंधें संबंध्ी समस्याओं का समाधन करते पाए जाते हैं। जैसे घटते या बढ़ते क्रम में वस्तुओं को लगाने की क्षमता।
वर्गीकरण वस्तुओं के गुण के अनुसार वगो± या उपवगो± मे बाँट पाने की क्षमता का विकास भी बच्चों में आ जाता है।
4. औपचारिक संक्रिया की अवस्था-पियाजे के अनुसार यह चौथी अवस्था है जो कि लगभग 11 वर्ष से आरंभ होती है, और पयस्कावस्था तक चलती है। इस अवस्था में बालक का चिन्तन अधिक अमूर्त, अधिक क्रमब(, लचीला और तार्किक हो जाता है।
औपचारिक संक्रिया अवस्था में चिन्तन की अमूर्त गुणवत्ता, मौखिक कथनों की समस्या हल करने की क्षमता में देखी जा सकती है उदाहरण के लिए यह तार्किक उत्तर। कि अगर । त्र ठ तथा ठ त्र ब् तो । त्र ब् है, को उनके सामने कथन स्वरूप में रखा जाए तो वे आसानी से निष्कर्ष तक पहुँच जाते हैं। पियाजे के अनुसार इस अवस्था में बच्चे वैज्ञानिकों की तरह तार्किक सोच रखते हैं। वे निगमात्मक पूर्वकल्पना तर्क का प्रयोग समस्या हल में करते हैं अर्थात वे समस्या के संभावित उत्तरों का परीक्षण करके बेहतर संभावित उत्तर को निष्कर्ष के रूप में खोजते हैं।
2. लिव सिमनोविच वाइगोत्सकी:संज्ञानात्मक विकास उपागम-
लिव सिमनोविच वाइगोत्सकी (1896-1934)का सामाजिक दृषिटकोण संज्ञानात्मक विकास का एक प्रगतिशील विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वस्तुत: रूसी मनोवैज्ञानिक वाइगोत्सकी ने बालक के संज्ञानात्मक विकास में समाज एवं उसके सांस्कृतिक संबन्धें के बीच संवाद को एक महत्त्वपूर्ण आयाम घोषित किया। पियाजे की तरह के वाइगोत्सकी (1896-1934)भी यह मानते थे कि बच्चे ज्ञान का निर्माण करते हंै। किन्तु इनके अनुसार संज्ञानात्मक विकास एकाकी नहीं हो सकता, यह भाषा विकास, सामाजिक विकास, यहाँ तक कि शारीरिक विकास के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में होता है।
वाइगोत्सकी के अनुसार बच्चे के संज्ञानात्मक विकास को समझने के लिए एक विकासात्मक उपागम की आवश्यकता है जो कि इसका शुरू से परीक्षण करे तथा विभिन्न रूपों हुए परिवर्तन को ठीक से पहचान पाएं। इस प्रकार एक विशिष्ट मानसिक कार्य जैसे- आत्म-भाषा को विकासात्मक प्रक्रियाओं के रूप में मूल्यांकित किया जाए न कि एकाकी रूप से।
वाइगोत्सकी के अनुसार यह आवश्यक है कि संज्ञानात्मक विकास को समझने के लिए उन औजारों का परीक्षण (जो कि संज्ञानात्मक विकास में मèयस्थता करते हैं तथा उसे रूप प्रदान करते हैं)अति आवश्यक है। इसी के आधर वह यह भी मानते हैं कि भाषा संज्ञानात्मक विकास का महत्त्वपूर्ण औजार है। इनके अनुसार आरमिभक बाल्यकाल में ही बच्चा अपने कायो± के नियोजन एवं समस्या समाèाान में भाषा का औजार की तरह उपयोग करने लग जाता है।
इसके अतिरिक्त वाइगोत्सकी का यह भी मानना है कि संज्ञानात्मक कौशल आवश्यक रूप से सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधें में बुने होते हैं।
वाइगोत्सकी के अनुसार जैविक कारक मानव विकास में बहुत ही कम किंतु आधरभूत भूमिका निभाते हैं, जबकि सामाजिक कारक उच्चतर संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं (जैसे- भाषा, स्मृति व अमूर्त चिंतन)में लगभग सम्पूर्ण व महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पियाजे के सि(ान्त (जिसमें जैविकता तथा विकास, अधिगम में अग्रणी भूमिका निभाते हैं)के विपरीत वाइगोत्सकी के सि(ान्तानुसार अधिगम व विकास सांस्कृतिक व सामाजिक वातावरण की मèयस्थता के साथ चलते हैं। संभावित विकास का क्षेत्रा र्(च्क्ए जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे)इस प्रक्रिया को और स्पष्ट करता है। उनका कहना है कि बालक के विकास को सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से अलग नहीं किया जा सकता, वह इन गतिविधि यों में अन्तर्निहित होता है।
वाइगोत्सकी के अनुसार अधिगम पहले बच्चे तथा वयस्क (या कोर्इ भी अधिक ज्ञानवान व्यकित)के बीच होता है तथा बाद में इनके अनुसार स्मृति èयान, तर्कशकित के विकास में, समाज की खोजों को सीखना (जैसे-भाषा, गणितीय प्रविधियाँ तथा स्मृति रणनीतियाँ इत्यादि)शामिल होता है मसलन किसी एक संस्कृति में कम्प्यूटर द्वारा गिनना अथवा किसी अन्य में अंगुलियों या मोतियों द्वारा गिनना। अत: इन तरीकों को ही बच्चा सीखता है।
वाइगोत्सकी के सि(ान्त के अनुसार ज्ञान बाहय वातावरण में सिथत तथा सहयोगी होता है, अर्थात ज्ञान विभिन्न व्यकितयों एवं वातावरण (जैसे- वस्तुओं, औजार, किताबें, मानवीय निर्मित्तियों इत्यादि)तथा समुदायों (जिनमें व्यकित रहता है)में वितरित होता है। यह सि(ान्त सुझाता है कि दूसरों के साथ अन्तक्र्रिया तथा सहयोगात्मक क्रियाओं द्वारा जानने की प्रक्रिया गुणात्मक रूप से श्रेष्ठ होती है।
इन दावों के आधर पर वाइगोत्सकी अधिगम तथा विकास के बारे में विशिष्ट तथा प्रभावी विचार प्रकट करते हैं। अत: वे इस बात पर जोर देते हैं कि संज्ञानात्मक विकास की प्रकृति वस्तुत: सामाजिक है न कि संज्ञानात्मक, जैसा कि पियाजे का मानना है। इस प्रकार पियाजे का सि(ान्त निर्मितिवाद है जबकि वाइगोत्सकी का सि(ान्त सामाजिक निर्मितिवाद है। वाइगोत्सकी के इन शब्दों से यह और भी अधिक स्पष्ट होता है। ''हमारे स्वयं का विकास दूसरों के द्वारा होता है।
अत: वाइगोत्स्की के अनुसार सभी मानसिक या बौ(िक क्रियाएँ पहले बाहरी समाज की दुनिया में घटित होती हैं तथा अन्त: क्रियाओं द्वारा बच्चे अपने समुदाय की संस्कृति (सोचने और व्यवहार करने क तरीके)को सीखते हैं और इसी के चलते वाइगोत्सकी ने सामाजिक वातावरण के विभिन्न पक्षों, जैसे- परिवार, समुदाय, मित्रा तथा विधालय की बच्चों के विकास में भूमिका पर बल दिया।
संभावित विकास का क्षेत्रा
वाइगोत्सकी द्वारा प्रयुक्त यह संप्रत्यय उस अन्तर को परिभाषित करता है जो कि बच्चे के द्वारा बिना किसी सहायता के किए गए निष्पादन तथा किसी वयस्क या अधिक कुशल साथी की मदद से किए गए निष्पादन में होता है। दूसरे शब्दों में बच्चा जो कर रहा है तथा जो करने की क्षमता रखता है के बीच के क्षेत्रा कोर् च्क् कहा जाता है। वाइगोत्सकी ने सामाजिक प्रभाव, मुख्यत: निर्देशन (बच्चे के संज्ञानात्मक विकास में योगदान)को दर्शाने हेतुर् च्क् के संप्रत्यय प्रयोग किया।
बच्चे कार् च्क् आँकने हेतु (उदाहरण के लिए)बु(ि परीक्षण में 2 बच्चों की मानसिक आयु 8 वर्ष आँकी गर्इ। इसके पश्चात यह देखने का प्रयास किया गया। कि बच्चे किस स्तर तक अपने से उम्र में बड़े बच्चों के लिए तैयार की गर्इ समस्याओं पर कार्य कर सकते हैं। इसके लिए बच्चों की करके दिखाना विधि, समस्या-समाधन विधि, प्रश्न विधि तथा समधन के शुरुआती चरण का प्रारम्भ करना आदि के साथ मदद की गर्इ। इस प्रयोग में देखा गया कि वयस्क की मदद एवं साथ से एक बच्चा 12 वर्षीय बच्चे के लिए बनार्इ गर्इ समस्या भी हल कर पाया तथा दूसरा बच्चा 9 वर्षीय बच्चे के लिए बनार्इ गर्इ समस्या को हल कर पाने में सपफल रहा।
ढाँचा निर्माण  ढाँचा निर्माण, विकास के संभावित क्षेत्रा से संबंधित संप्रत्यय है। ढाँचा निर्माण एक तकनीक है जो सहायता के स्तर में परिवर्तन करती है। शिक्षण करते समय या सहयोगी अधिगम में शिक्षक या अधिक कौशल वाले सहयोगी को अधिगमकत्र्ता के समसामयिक निष्पादन के अनुसार अपने परामर्श को समायोजित करना पड़ता है। जैसे कि यदि कोर्इ नयी तरह की समस्या है तो अधिक निर्देशन देने पड़ते है, परन्तु जैसे-जैसे छात्रा की क्षमता व कार्य अभ्यास बढ़ता जाता है निर्देशनों की संख्या कम हो जाती है।
वाइगोत्सकी के अनुसार संवाद (क्पंसवहनम)ए ढाँचा निर्माण (ैबंविसकपदह)का महत्त्वपूर्ण औजार है। बच्चों के पास अव्यवसिथत तथा असंगठित संप्रत्यय होते हैं जबकि कुशल सहायक के पास क्रमब( तार्किक एवं बु(ि संगत विचार होते हैं। बच्चे तथा कुशल सहायक के बीच संवाद के परिणाम स्वरूप बच्चे के विचार ज्यादा क्रमब( संगठित , तर्कसंगत एवं औचित्यपूर्ण हो जाते हैं।
भाषा और विचार-वाइगोत्सकी के अनुसार बच्चे भाषा का प्रयोग न केवल सामाजिक संप्रेषण अपितु स्व-निर्देशित तरीके से कार्य करने के लिए, अपने व्यवहार हेतु योजना बनाने, निर्देश देने व मूल्यांकित करने में भी करते हैं। स्व-निर्देशन में भाषा के प्रयोग को आन्तरिक स्व-भाषा या निजी भाषा कहा जाता है। पियाजे ने निजी भाषा को आत्म केनिद्रत तथा अपरिपक्व माना है, परन्तु वाइगोत्सकी के अनुसार आरंभिक बाल्यावस्था में यह बालक के विचारों का एक महत्त्वपूर्ण साध्न है।
जीन पियाजे एवं वाइगोत्सकी के संज्ञानात्मक विकास दृषिटकोण में कुछ आधरभूत विभेद है। जिनको संक्षिप्त रूप में निम्न तालिका में स्पष्ट गया है।     
पियाजे व वाइगोत्सकी के सि(ान्तों की तुलना:
विषय जीन पियाजे वाइगोत्सकी
1. सामाजिक इन्होंने बालक के विकास में इन्होंने बालक के विकास में सामाजिक सांस्कृतिक सामाजिक सांस्कृतिक संदर्भ सांस्कृतिक संदर्भ का योगदान महत्त्वपूर्ण संदर्भ का बहुत कम योगदान माना है। माना है।
2. निर्मितवाद ज्ञानात्मक निर्मितिवाद सामाजिक निर्मितिवाद
3. अवस्थाएँ संज्ञानात्मक विकास की चार सज्ञानात्मक विकास के लिए कोर्इ अवस्थाएं निर्धरित की सामान्य अवस्थाएँ नहीं
4. मुख्य प्रक्रियाएँ स्कीमा, अनुकूलन आत्मसातीकरण,र् च्क्ए ैबंविसकपदह साम्यधरण समायोजन, संक्रिया भाषा, सांस्कृतिक औजार, संवाद
5. भाषा की अल्प भूमिका, संज्ञानात्मक भाषा की महत्पूर्ण भूमिका होती है भूमिका विकास भाषा को तथा वह विचारों को आकार प्रदान निर्देशित करता है करती है।
6. शिक्षा की शिक्षा बालक के संज्ञानात्मक शिक्षा की प्रक्रिया संज्ञानात्मक विकास में भूमिका कौशलों (जो उसमें पहले विकसित महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है यह बच्चे हो चुके हैं)को बेहतर बनाने का को सांस्कृतिक औजार प्रदान करती है। काम करती है।
7. शिक्षा हेतु शिक्षक को सुविध प्रदायक तथा ये भी शिक्षक को सुविध प्रदायक तथा निहितार्थ मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। साथ ही
न कि निर्देशक के रूप में। शिक्षक बच्चों को वह अवसर प्रदान जो कि बच्चों को विश्व के करता है जिसमें बच्चा अपने से अधिक बारे में जानने व खोजने में कुशल साथी, वयस्क अथवा शिक्षक सहायता करता है। के साथ सीखता है।